मंगलवार, 27 अक्टूबर 2009

अहसास

Black (25)

तुम हो ही नही

तुम्हारे होने का अहसास है

और यहा अभी इस पल

इस खुरदुरे पन्ने से निकलकर

अहसास से विश्वास मे ढलकर

तुम सजीव हो

तुम मेरे पास हो

2 टिप्‍पणियां:

padmja sharma ने कहा…

कविता में एहसास और विश्वास का भाव सुंदर है .

Maya ने कहा…

aap bahut acha likhte hai...yunhi aap ke blog par aana hua aur kaufi dilchasp maloom hue aap aur aapke shabd.